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हाइलाइट्स:

  • असम राइफल्स की 9 महिला सैनिक आर्मी के साथ कॉम्बेट रोल में तैनात
  • महिला सैनिक नार्कोटिक्स स्मगलिंग रोकने के लिए बनाए गए ग्रिड का हिस्सा
  • पाकिस्तान से नार्कोटिक्स स्मगलिंग है टेरर फंडिंग का बड़ा जरिया

तंगधार (कश्मीर)
पैरामिलिट्री फोर्स असम राइफल्स की 9 महिला सैनिकों को पहली बार आर्मी के साथ कॉम्बेट रोल में लाइन ऑफ कंट्रोल के काफी पास तैनात किया गया है। इसी साल जुलाई से यहां तैनात महिला सैनिक नार्कोटिक्स स्मगलिंग रोकने के लिए बनाए गए ग्रिड का हिस्सा हैं। इन्हें साधना पास पर तैनात किया गया है जो तंगधार को जोड़ने वाला एक मात्र पास है। यह कुपवाड़ा-तंगधार हाईवे पर है।

महिला सैनिकों की तैनाती से मिली मजबूती
पाकिस्तान से नार्कोटिक्स स्मगलिंग रोकने के लिए कई कदम उठाने का यह नतीजा रहा कि इसी साल तंगधार सेक्टर में 80 किलो नार्कोटिक्स जब्त की गई जिसमें ज्यादातर ब्राउन शुगर थी। वहां तैनात एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पिछले साल भी लगभग इतनी ही नार्कोटिक्स जब्त की गई। यहां एलओसी पर फेंस से आगे भी कई गांव हैं। अकेले तंगधार में ही 12 गांव फेंस के आगे हैं। यह स्मगलिंग रोकने में एक बड़ी चुनौती साबित होते हैं।

9 महिला सैनिकों को साधना पास पर जहां तैनात किया गया है यह 10 हजार से ज्यादा फीट की ऊंचाई पर है। एक वक्त में तीन सैनिक ड्यूटी पर रहती हैं। उन्हें यहां तैनाती से पहले 15 वीं कोर के बैटल स्कूल में 21 दिन की स्पेशल ट्रेनिंग भी दी गई। यहां से गुजरने वाली महिलाओं की तलाशी यह महिला सैनिक लेती हैं। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि ये स्मगलिंग का एक जरिया ब्लॉक कर रही हैं जो काफी अहम है। पहले स्पेशफिक इंटेलिजेंस मिलने पर भी कि कोई महिला नार्कोटिक्स ले जा रही है, हम उसकी तलाशी नहीं ले पाते थे। लेकिन अब स्मगलिंग के उस जरिए पर भी कंट्रोंल किया गया है।

टेरर फंडिंग का बड़ा जरिया है स्मगलिंग
एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि स्मगलिंग टेरर फंडिंग का बढ़ा जरिया है। घाटी में मौजूद आतंकियों को मदद पहुंचाने के लिए स्मगलिंग के जरिए फंडिंग की जाती है, जिस पर काफी हद तक रोक लगी है। साथ ही आज अगर कोई नार्कोटिक्स लेकर आ रहा है तो वह कल फेक करंसी और फिर हथियार या आईईडी भी लेकर आ सकता है। नार्कोटिक्स स्मगलिंग कुछ सालों से जारी है लेकिन पिछले दो साल में रिकवरी बढ़ी है। पिछले साल ग्रिड में 4 नॉर्कोटिक्स डॉग भी शामिल किए गए हैं और साथ ही एक्सरे मशीन भी लगाई गई है। अलग अलग पॉइंट पर रेंडम चेकिंग की जाती है ताकि सरप्राइज फैक्टर बना रहे और स्मगलिंग करने वाले में पकड़े जाने का डर भी बना रहे।

kasmir

क्यों कहते हैं कटी नाक
साधना पास पर जहां महिला सैनिक तैनात हैं यहां अभी से ठंड बढ़नी शुरू हो गई है। सर्दियों में यहां 20-30 फीट ऊंची बर्फ जम जाती है। यहां तीन महीने से तैनात राइफल वुमन नीतू कुमारी बिहार से हैं। वह कहती हैं कि गांव के लोग महिला सैनिकों को देखकर खुश हैं। यहां की महिलाएं भी खुलकर हमसे बात करती हैं और दिक्कतें बताती हैं। वह कहती हैं कि हम भी अपनी बेटियों को आपकी तरह बनाएंगे। चुनौतियों के बारे में पूछने पर वह कहती हैं कि अब ठंड बढ़ने लगी है।

साधना पास को फौजी एनसी पास कहते हैं यानी नस्ता चुन पास, जिसका मतलब होता है कटी नाक। यहां इतनी सर्दी होती है कि अपनी नाक भी महसूस नहीं कर सकते इसलिए इसे एनसी कहते हैं। तंगधार की सारी सप्लाई इसी रास्ते होती है। गांव की आबादी करीब 90 हजार है और वहां तैनात सैनिकों के लिए यहीं से सप्लाई होती है। कुछ साल पहले तक सर्दियों में यह पास दिसंबर से अप्रैल तक बंद हो जाता था लेकिन अब आर्मी और बीआरओ के पास ऐसे इक्विपमेंट हैं कि पास कुछ दिन के लिए ही बंद होता है।

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