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पेइचिंग
भारत के साथ लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक सीमा विवाद के बीच चीन वहां से आबादी को हटाने का काम कर रहा है। अब चीन ने इस बात को माना भी है कि वह स्थानीय तिब्बत आबादी को ‘रीलोकेट’ कर रहा है। भारत-भूटाना सीमा से तिब्‍बती लोगों को हटाने का काम वर्ष 2018 में ही शुरू हो गया था। उस समय ले गांव के 24 घरों के 72 लोगों को नए घरों से शिफ्ट किया गया था।

2.66 लाख लोग हटाए गए
पुनर्स्थापन के नाम पर इन लोगों को हटाया जा रहा है। ग्लोबल टाइम्स ने ट्वीट किया है कि तिब्बत में पार्टी अध्यक्ष वू यिंगजी ने कहा कि गुरुवार को स्थानीय निवासियों ने अपनी मर्जी से गरीब लोगों के पुनर्स्थापन के लिए बनाए गए प्रोग्राम में शामिल होने का फैसला किया है। अब तक 2 लाख 66 हजार लोगों को यहां से दूसरी जगहों पर पहुंचाया जा चुका है।

बेहतर आमदनी का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबित ये नए घर उनके मूल घरों से काफी दूर बनाए गए हैं। इस तरह ये ग्रामीण सैकड़ों साल से जिस इलाके में रह रहे थे, उसे छोड़कर दूर भेजे जा रहे हैं। चीन ने दावा किया है कि इससे तिब्‍बती लोगों की आमदनी बेहतर हो रही है। वहीं, अगस्त में ऐसी खबरें आई थीं कि चीन तवांग के पास स्थित इसे सीमाई इलाकों को सुदृढ़ बनाने की योजना के तहत ऐसा कर रहा है। इसी इलाके से कुछ ही दूरी पर चीन भारत के किसी हवाई हमले से निपटने के लिए सतह से हवा में मार करने वाली म‍िसाइलें तैनात कर रहा है।

तवांग: भारत से तनाव के बीच भूटान-अरुणाचल प्रदेश की सीमा से अपने नागरिकों को हटा रहा चीन!

96 गावों के लोगों को हटा रहा
चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स की रिपोर्ट यह खुलासा हुआ है कि दक्षिण पश्चिम चीन में शन्‍नान काउंटी से ये लोग हटाए जा रहे है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन भारत और भूटान से लगे अपने 96 गावों के लोगों को सीमा से दूर नए घर बनाकर बसा रहा है। चीन ने दावा किया है कि इन नए घरों में ग्रामीणों के लिए बिजली, पानी और इंटरनेट की सुविधा मुहैया कराई गई है।

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