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राहुल त्रिपाठी, नई दिल्ली
पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय सेना डटकर सामना कर रही है। भारत की कार्रवाई से घबराए चीन ने नए पैंतरे आजमाने शुरू कर दिए है। भारत की देखादेखी चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। एएलसी के पास चीनी सेना पीएलए के कुल 52,000 सैनिक तैनात हैं जिनमें से 10 हजार सिर्फ पैंगोग झील के दक्षिणी किनारे पर तैनात हैं।

बता दें कि पैंगोग झील के दक्षिणी किनारे पर 29-30 अगस्त की रात चीन की तरफ घुसपैठ की कोशिश को भारत ने विफल कर दिया था। इसके बाद से ही क्षेत्र में दोनों ओर की सेनाएं तैनात हैं। भारतीय सुरक्षाबलों के हालिया विस्तृत आकलन में यह जानकारी सामने आई है जिसे हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स ने साझा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने मिरर डिप्लॉयमेंट किया है यानी भारत की देखादेखी चीन ने भी इलाके में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है।

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एलएसी के पास चीन की 50 बटालियन जुटी
आकलन रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख में एएलसी के पास पीएलए की बटालियन की संख्या में पिछले महीने से इस बार इजाफा हुआ है। अगस्त में लद्दाख में पीएलए की 35 बटालियन मौजूद थीं जो सितंबर में बढ़कर 50 हो गईं। हर बटालियन में 1,000 से 1,200 के बीच सैनिक होते हैं।

29 अगस्त के बाद 7 सितंबर को एक बार फिर पीएलए की एक इकाई ने भारतीय सेना की एक फॉरवर्ड पोजिशन के करीब आने की कोशिश की थी जिसे भारतीय सैनिकों फेल कर दिया था। इसके बाद चीन की तरफ से हवा में फायरिंग हुई थी।

पैंगोंग झील पर चीनी सेना की नजर
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘फिलहाल पिछले हफ्ते से घुसपैठ या गतिरोध का कोई नया केस सामने नहीं आया है लेकिन इलाके में पीएलए का मूवमेंट लगातार जारी है। सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना एएलसी के नजदीक यथास्थिति में बदलाव की कोशिश कर रही है और भारतीय सेना लगातार चीन का साजिश नाकाम कर रही है। चीनी सेना ने अब पैंगोंग झील के इर्द-गिर्द चार मुख्य जगहों पर नजर गढ़ाए हुए है।

इस हफ्ते होने वाली बैठक में निकलेगा हल?
सेना के अधिकारी ने बताया, ‘गतिरोध वाले इलाकों की संख्या बढ़ाने से सैनिकों में विश्वास की कमी आती है। इस हफ्ते होने वाली सैन्य स्तर की बातचीत से इलाके पर जारी गतिरोध पर कुछ मसला निकलने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक के लिए सैन्य बल हाई अलर्ट और सर्विलांस पर हैं। जब तक गतिरोध को लेकर बातचीत पूरी होने तक भारतीय सेना इलाके में ऊंची चोटियों पर डटे रहेंगे।

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