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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 13 Nov 2020 02:09 AM IST

एससीओ सम्मेलन में पीएम मोदी (फाइल फोटो)
– फोटो : एएनआई

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भारत पहली बार 30 नवंबर को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वर्चुअल सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस सम्मेलन के लिए पाकिस्तान समेत सभी आठ सदस्य देशों को न्योता भेज दिया गया है। भारत और पाकिस्तान 2017 में एससीओ के स्थायी सदस्य बने थे। भारत और पाकिस्तान के अलावा एससीओ में रूस, चीन, कजाखिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव न बताया कि मेजबान होने के नाते हमने आठों एससीओ सदस्यों को निमंत्रण भेज दिया है। साथ ही चार पर्यवेक्षक देशों, एससीओ महासचिव और एससीओ आरएटीएस निदेशक को भी निमंत्रण भेजा या है। 

एससीओ में चर्चा के दौरान द्विपक्षीय मुद्दे नहीं लाए जाने चाहिए: रूस
रूस ने भारत की इस बात का गुरुवार को समर्थन किया कि पाकिस्तान को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में चर्चा के दौरान कश्मीर जैसे द्विपक्षीय मुद्दों को नहीं लाना चाहिए। इसने कहा कि ऐसा करना समूह के सिद्धांतों के खिलाफ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन के डिजिटल शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मंगलवार को समूह के आधारभूत सिद्धांतों का उल्लंघन कर एससीओ में द्विपक्षीय मुद्दों को ‘अनावश्यक रूप से’ लाने के बार-बार प्रयास करने वालों पर हमला बोला था। मोदी की इन टिप्पणियों को एससीओ में कश्मीर का मुद्दा उठाने के पाकिस्तान के प्रयास के संदर्भ में देखा गया था।

रूसी मिशन के उपप्रमुख रोमन बाबुश्किन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘यह एससीओ चार्टर का हिस्सा है कि द्विपक्षीय मुद्दों को (एससीओ के) एजेंडे में न लाया जाए और हमने यह सभी सदस्य देशों को स्पष्ट कर दिया है कि बहुपक्षीय सहयोग की प्रगति की खातिर इससे बचा जाना चाहिए।’

वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या एससीओ अध्यक्ष के रूप में रूस ने पाकिस्तान के समक्ष संबंधित मुद्दा उठाया है। बाबुश्किन ने कहा कि ‘जहां तक भारत-पाकिस्तान विवाद का संबंध है, हमारी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। हम उम्मीद करते हैं कि इस तरह की घटना न हो।’

सितंबर के मध्य में एससीओ सदस्य राष्ट्रों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की डिजिटल बैठक से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने तब बहिर्गमन किया था जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने ऐसा नक्शा प्रस्तुत किया, जिसमें कश्मीर को गलत तरीके से दिखाया गया था। नई दिल्ली ने बैठक के नियमों का ‘खुला निरादर’ करने को लेकर पाकिस्तान की निंदा की थी।

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के चतुर्पक्षीय गठबंधन ‘क्वाड’ के बारे में पूछे जाने पर बाबुश्किन ने कहा कि हिन्द और प्रशांत महासागरों में समावेशी समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के नयी दिल्ली के इरादों के बारे में रूस को कोई संदेह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है।

भारत पहली बार 30 नवंबर को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वर्चुअल सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस सम्मेलन के लिए पाकिस्तान समेत सभी आठ सदस्य देशों को न्योता भेज दिया गया है। भारत और पाकिस्तान 2017 में एससीओ के स्थायी सदस्य बने थे। भारत और पाकिस्तान के अलावा एससीओ में रूस, चीन, कजाखिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव न बताया कि मेजबान होने के नाते हमने आठों एससीओ सदस्यों को निमंत्रण भेज दिया है। साथ ही चार पर्यवेक्षक देशों, एससीओ महासचिव और एससीओ आरएटीएस निदेशक को भी निमंत्रण भेजा या है। 

एससीओ में चर्चा के दौरान द्विपक्षीय मुद्दे नहीं लाए जाने चाहिए: रूस

रूस ने भारत की इस बात का गुरुवार को समर्थन किया कि पाकिस्तान को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में चर्चा के दौरान कश्मीर जैसे द्विपक्षीय मुद्दों को नहीं लाना चाहिए। इसने कहा कि ऐसा करना समूह के सिद्धांतों के खिलाफ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन के डिजिटल शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मंगलवार को समूह के आधारभूत सिद्धांतों का उल्लंघन कर एससीओ में द्विपक्षीय मुद्दों को ‘अनावश्यक रूप से’ लाने के बार-बार प्रयास करने वालों पर हमला बोला था। मोदी की इन टिप्पणियों को एससीओ में कश्मीर का मुद्दा उठाने के पाकिस्तान के प्रयास के संदर्भ में देखा गया था।

रूसी मिशन के उपप्रमुख रोमन बाबुश्किन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘यह एससीओ चार्टर का हिस्सा है कि द्विपक्षीय मुद्दों को (एससीओ के) एजेंडे में न लाया जाए और हमने यह सभी सदस्य देशों को स्पष्ट कर दिया है कि बहुपक्षीय सहयोग की प्रगति की खातिर इससे बचा जाना चाहिए।’

वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या एससीओ अध्यक्ष के रूप में रूस ने पाकिस्तान के समक्ष संबंधित मुद्दा उठाया है। बाबुश्किन ने कहा कि ‘जहां तक भारत-पाकिस्तान विवाद का संबंध है, हमारी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। हम उम्मीद करते हैं कि इस तरह की घटना न हो।’

सितंबर के मध्य में एससीओ सदस्य राष्ट्रों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की डिजिटल बैठक से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने तब बहिर्गमन किया था जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने ऐसा नक्शा प्रस्तुत किया, जिसमें कश्मीर को गलत तरीके से दिखाया गया था। नई दिल्ली ने बैठक के नियमों का ‘खुला निरादर’ करने को लेकर पाकिस्तान की निंदा की थी।

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के चतुर्पक्षीय गठबंधन ‘क्वाड’ के बारे में पूछे जाने पर बाबुश्किन ने कहा कि हिन्द और प्रशांत महासागरों में समावेशी समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के नयी दिल्ली के इरादों के बारे में रूस को कोई संदेह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है।

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