Only Hindi News Today

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

Updated Wed, 16 Sep 2020 12:25 PM IST

भारतीय सेना का मुस्तैद जवान
– फोटो : iStock



पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर


कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹365 & To get 20% off, use code: 20OFF

ख़बर सुनें

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच एक नया खुलासा हुआ है। भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की 10 सितंबर को मॉस्को में हुई बैठक से पहले लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच फायरिंग हुई थी। भारत और चीन के सैनिकों के बीच ये फायरिंग पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर हुई और यह चुशूल सेक्टर में हुई फायरिंग से ज्यादा गंभीर थी। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में इसका खुलासा किया गया है। 

इस घटना से परिचित एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह घटना पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट पर फिंगर्स क्षेत्र पर हावी होने के दौरान हुई। अधिकारी के अनुसार, झील के उत्तरी छोर पर दोनों तरफ से 100 से 200 राउंड हवाई फायर हुए थे। यह घटना रिजलाइन पर हुई थी, जहां फिंगर-3 और फिंगर-4 के इलाके मिलते हैं।

भारत और चीन दोनों ने सात सितंबर को चुशूल उप-सेक्टर में गोलीबारी की घटना पर बयान जारी किए थे, जो मुकपारी हाइट्स नामक जगह पर हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि 45 वर्षों में यह पहली बार था कि एलएसी पर दोनों पक्षों की तरफ से गोलीबारी की गई। 

यह भी पढ़ें: राजनाथ सिंह के बयान से चीन की बौखलाहट बढ़ी, सरकारी अखबार में लिखा- सर्दियों में बढ़ेगा तनाव

हालांकि, अभी तक दोनों ही देशों की तरफ से पेंगोंग त्सो झील के किनारे हुए इस घटना को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है। इसको लेकर माना जा रहा है कि ये चुशूल में हुई गोलीबारी की घटना से अधिक बड़ी थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने बताया कि सितंबर के पहले हफ्ते में पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर काफी गतिविधियां हुई थीं। कई बार फायरिंग भी हुई। तनाव अभी बरकरार है। चुशूल सेक्टर में कई जगहों पर भारत और चीन के सैनिक एक-दूसरे से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर तैनात हैं। इस बीच दोनों देशों की सेना के अफसरों के बीच फिर से बातचीत होनी है।

अधिकारी ने कहा कि सीमा पर एक छोटी घटना भी हुई, लेकिन सैनिकों ने माना कि यह इतनी महत्वपूर्ण नहीं है कि इसे रिपोर्ट किया जाए। उन्होंने बताया कि यह घटना मुकपारी में हुई, जहां कुछ राउंड गोलियां चलीं। इस घटना के बारे में हमें एक दिन बाद पता चला। 

उन्होंने बताया कि इसके बाद पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर गोलियां चलीं, जिसमें दोनों ही पक्षों की तरफ से 100 से 200 राउंड फायरिंग की गई। यह घटना फिंगर-3 और फिंगर-4 के पास हुई, जहां से चढ़ाई शुरू होती है।

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच एक नया खुलासा हुआ है। भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की 10 सितंबर को मॉस्को में हुई बैठक से पहले लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच फायरिंग हुई थी। भारत और चीन के सैनिकों के बीच ये फायरिंग पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर हुई और यह चुशूल सेक्टर में हुई फायरिंग से ज्यादा गंभीर थी। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में इसका खुलासा किया गया है। 

इस घटना से परिचित एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह घटना पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट पर फिंगर्स क्षेत्र पर हावी होने के दौरान हुई। अधिकारी के अनुसार, झील के उत्तरी छोर पर दोनों तरफ से 100 से 200 राउंड हवाई फायर हुए थे। यह घटना रिजलाइन पर हुई थी, जहां फिंगर-3 और फिंगर-4 के इलाके मिलते हैं।

भारत और चीन दोनों ने सात सितंबर को चुशूल उप-सेक्टर में गोलीबारी की घटना पर बयान जारी किए थे, जो मुकपारी हाइट्स नामक जगह पर हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि 45 वर्षों में यह पहली बार था कि एलएसी पर दोनों पक्षों की तरफ से गोलीबारी की गई। 

यह भी पढ़ें: राजनाथ सिंह के बयान से चीन की बौखलाहट बढ़ी, सरकारी अखबार में लिखा- सर्दियों में बढ़ेगा तनाव

हालांकि, अभी तक दोनों ही देशों की तरफ से पेंगोंग त्सो झील के किनारे हुए इस घटना को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है। इसको लेकर माना जा रहा है कि ये चुशूल में हुई गोलीबारी की घटना से अधिक बड़ी थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने बताया कि सितंबर के पहले हफ्ते में पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर काफी गतिविधियां हुई थीं। कई बार फायरिंग भी हुई। तनाव अभी बरकरार है। चुशूल सेक्टर में कई जगहों पर भारत और चीन के सैनिक एक-दूसरे से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर तैनात हैं। इस बीच दोनों देशों की सेना के अफसरों के बीच फिर से बातचीत होनी है।

अधिकारी ने कहा कि सीमा पर एक छोटी घटना भी हुई, लेकिन सैनिकों ने माना कि यह इतनी महत्वपूर्ण नहीं है कि इसे रिपोर्ट किया जाए। उन्होंने बताया कि यह घटना मुकपारी में हुई, जहां कुछ राउंड गोलियां चलीं। इस घटना के बारे में हमें एक दिन बाद पता चला। 

उन्होंने बताया कि इसके बाद पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर गोलियां चलीं, जिसमें दोनों ही पक्षों की तरफ से 100 से 200 राउंड फायरिंग की गई। यह घटना फिंगर-3 और फिंगर-4 के पास हुई, जहां से चढ़ाई शुरू होती है।

Source link

Leave a Reply