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काठमांडू22 मिनट पहले

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फोटो पिछले महीने की है। तब नेपाल सरकार और सेना की एक टीम ने हुमला जिले के उन हिस्सों का दौरा किया था, जिन पर चीन ने कब्जा किया है। तब चीन ने इस टीम को अपनी इमारतों में जाने से रोक दिया था।

  • नेपाली कांग्रेस का दावा है कि ओली की सरकार चीन की हरकत पर पहले चुप रही बाद में कब्जे से इनकार किया
  • नेपाली मीडिया में पिछले महीने दावा किया गया था कि चीन ने हुमला जिले के बड़े हिस्से में इमारतें बनाई हैं

नेपाल की जमीन पर चीन के कब्जे का मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चीन ने नेपाल के हुमला जिले में बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार इस मामले पर चुप है। नेपाली कांग्रेस ने एक बयान में कहा- ओली की अगुआई वाली कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार सच छिपाकर देश को धोखा दे रही है। पिछले महीने नेपाली मीडिया की खबरों में कहा गया था कि चीन ने हुमला जिले में 11 इमारतें बनाई हैं।

नेपाली कांग्रेस ने क्या कहा
बुधवार को जारी बयान में नेपाली कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। इसमें कहा गया- हुमला जिले में चीन के कब्जे से पहले तो सरकार ने इनकार किया। इसके बाद चुप हो गई। यह साफ तौर पर देशद्रोह का मामला है। सरकार अब सच पर पर्दा डालकर देश को धोखा दे रही है। जबकि, कब्जे के सबूत मौजूद हैं।

दो किलोमीटर अंदर आ गई चीन की फौज
पिछले महीने जब हुमला में चीन के कब्जे की खबर वहां के स्थानीय प्रशासन ने दी तो नेपाल की होम मिनिस्ट्री ने वहां एक टीम भेजी। इसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, हिमालय टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चीन की सेना इस इलाके में दो किलोमीटर अंदर आ चुकी है। बताया जाता है कि चीन ने नामखा नगरपालिका क्षेत्र के लिमि एरिया पर कब्जा किया है। हुमला जिला प्रशासन ने भी इस बारे में रिपोर्ट दी थी। लेकिन, नेपाल का विदेश मंत्रालय कुछ बोलने तैयार नहीं। अब नेपाली कांग्रेस इस पर सवाल उठा रही है।

नेपाली कांग्रेस ने कहा- ओली सरकार देश की संप्रभुता से समझौता कर रही है और यह दुखद है। हम सरकार के रवैये की निंदा करते हैं। चीन उत्तर या दक्षिण में मौजूद नेपाल के किसी हिस्से पर कब्जा नहीं कर सकता। सरकार की चुप्पी देश के साथ धोखा है। नेपाल सरकार को एक डिप्लोमैटिक नोट के जरिए चीन से विरोध जताना चाहिए।

विवाद की वजह क्या
नेपाल के अखबार ‘काठमांडू पोस्ट’ में पिछले महीने एक रिपोर्ट पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, हुमला जिले में चीन ने 11 बिल्डिंग्स बनाई हैं। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत अफसरों से की। इसके बाद गृह मंत्रालय की एक टीम यहां पहुंची। वहां चीनी सैनिक मौजूद थे। स्थानीय लोगों को चीनी सैनिक यहां आने भी नहीं देते। बताया जाता है कि नेपाल की जमीन पर कब्जा करने के लिए चीनी सैनिकों ने यहां लगे कई पिलर गायब कर दिए।

इसके बाद काठमांडू में चीन की एम्बेसी के बाहर सैकड़ों लोगों ने हाथ में बैनर और पोस्टर लेकर जिनपिंग सरकार की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।

दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है चीन
नेपाल के अफसरों की टीम यहां मुआयना करने पहुंची तो चीनी सेना ने वहां अपने ट्रक, टैंकर और जीप भेज दीं। इन सभी में सैनिक मौजूद थे। चीनी सैनिकों ने नक्शा दिखाते हुए दावा किया कि यह क्षेत्र उनकी सीमा में आता है। चीन की एम्बेसी के प्रवक्ता झेंग सी ने कहा था- इस बारे में पहले भारतीय मीडिया ने खबरें फैलाईं थीं। अब नेपाली मीडिया भी यही कर रहा है। यह हमारा इलाका है और इसीलिए वहां बिल्डिंग्स बनाई गई हैं।

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