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अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

Updated Thu, 15 Oct 2020 07:00 AM IST



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सर्दियों में कोरोना वायरस का प्रसार फिर से बढ़ सकता है। कोरोना के इस दूसरे पीक को लेकर सरकार ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। एक ओर सरकार प्रसार को रोकने के लिए जनांदोलन चला रही है। वहीं गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार ने एक लाख मीट्रिक टन ऑक्सीजन विदेशों से खरीदने की योजना बनाई है। इसे लेकर बुधवार को एक टेंडर भी जारी किया गया है।

मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, बीते 10 अक्तूबर को कैबिनेट सचिव के साथ बैठक में ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर चर्चा की गई थी, जिसके बाद यह तय किया गया कि विदेशों से एक लाख मीट्रिक टन ऑक्सीजन को खरीदा जाए। इस प्रतिक्रिया में करीब एक से डेढ़ माह का वक्त लग सकता है। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखें तो ऑक्सीजन पर्याप्त है, लेकिन आगामी त्योहार के दिनों के साथ साथ सर्दियों के चलते एहतियात भी जरूरी है।

देश में फिलहाल एक दिन में सात हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से करीब 3094 टन ऑक्सीजन कोरोना और अन्य मरीजों के लिए इस्तेमाल हो रही है। जबकि लॉकडाउन से पहले तक देश में रोजाना छह हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता थी जिसमें एक हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन का इस्तेमाल मरीजों के लिए किया जा रहा था।

लॉकडाउन के दौरान बढ़े संक्रमित मरीजों के चलते ऑक्सीजन की मांग तीन गुना अधिक बढ़ गई है। ऐसे में सरकार का मानना है कि अनलॉक में जहां औद्योगिक गतिविधियां वापस से शुरू हो रही हैं। ऐसे में मरीजों को ऑक्सीजन की दिक्कत न हो, इसलिए पहले से ही उसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि देश में 3.97 फीसदी संक्रमित मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। जबकि 2.46 फीसदी आईसीयू में भर्ती हैं।

सर्दियों में कोरोना वायरस का प्रसार फिर से बढ़ सकता है। कोरोना के इस दूसरे पीक को लेकर सरकार ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। एक ओर सरकार प्रसार को रोकने के लिए जनांदोलन चला रही है। वहीं गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार ने एक लाख मीट्रिक टन ऑक्सीजन विदेशों से खरीदने की योजना बनाई है। इसे लेकर बुधवार को एक टेंडर भी जारी किया गया है।

मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, बीते 10 अक्तूबर को कैबिनेट सचिव के साथ बैठक में ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर चर्चा की गई थी, जिसके बाद यह तय किया गया कि विदेशों से एक लाख मीट्रिक टन ऑक्सीजन को खरीदा जाए। इस प्रतिक्रिया में करीब एक से डेढ़ माह का वक्त लग सकता है। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखें तो ऑक्सीजन पर्याप्त है, लेकिन आगामी त्योहार के दिनों के साथ साथ सर्दियों के चलते एहतियात भी जरूरी है।

देश में फिलहाल एक दिन में सात हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से करीब 3094 टन ऑक्सीजन कोरोना और अन्य मरीजों के लिए इस्तेमाल हो रही है। जबकि लॉकडाउन से पहले तक देश में रोजाना छह हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता थी जिसमें एक हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन का इस्तेमाल मरीजों के लिए किया जा रहा था।

लॉकडाउन के दौरान बढ़े संक्रमित मरीजों के चलते ऑक्सीजन की मांग तीन गुना अधिक बढ़ गई है। ऐसे में सरकार का मानना है कि अनलॉक में जहां औद्योगिक गतिविधियां वापस से शुरू हो रही हैं। ऐसे में मरीजों को ऑक्सीजन की दिक्कत न हो, इसलिए पहले से ही उसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि देश में 3.97 फीसदी संक्रमित मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। जबकि 2.46 फीसदी आईसीयू में भर्ती हैं।

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