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सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के एक पूर्व कर्मचारी को दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति के समक्ष गुरुवार को पेश किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि कंपनी के शीर्ष अधिकारी कंटेंट पुलिसिंग नियमों में हस्तक्षेप करते हैं। फेसबुक के पूर्व कर्मचारी मार्क लकी ने इस बात का दावा किया कि अगर फेसबुक ने सही समय पर एक्शन लिया होता तो दिल्ली दंगे, म्यांमार जनसंहार और श्रीलंका में हुए दंगों को रोका जा सकता था।  दरअसल समिति ने फेसबुक के अधिकारियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले कंटेंट को जानबूझ कर नजरअंदाज करने से संबंधित आई शिकायतों की सुनवाई करते हुए गुरुवार को बैठक की थी। राघव चड्ढा की अध्यक्षता में ये बैठक हुई। 

मार्क एस. लकी ने ये बयान दर्ज करवाया है। उन्होंने अक्टूबर 2017 और नवंबर 2018 के बीच फेसबुक के ग्लोबल इन्फ्लुएंसर्स विभाग में एक प्रबंधक के रूप में काम किया था। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई टीमों के साथ शामिल होने का दावा किया था जो कंपनी के मुख्य कार्यों को संभालती हैं।

लकी ने कहा कि फेसबुक के पॉलिसी हेड समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों के इशारे पर कंटेंट मॉडरेशन टीम पर दबाव बनाया जाता है। इस सब की वजह से कई बार फेसबुक को अपने ही कम्युनिटी स्टैंडर्ड से समझौता करना पड़ता है। साथ ही उन्होंने कहा कि फेसबुक कंटेंट मॉडरेशन के संबंध में ऐसी नीतियां बना रहा है, जो पारदर्शी नहीं हैं।

इससे पहले मार्क ने अपने लेख में कहा था कि फेसबुक में कमजोर वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित रखने का भी सिलसिला चल रहा है। मार्क ने कहा कि ये सब अमेरिका में हो रहा है, लेकिन निश्चित तौर पर ऐसा ही अन्य देशों में भी हो रहा होगा। 

उन्होंने कहा की कि फेसबुक के लिए भारत के बाद अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इसके बावजूद फेसबुक भारत में अमेरिका जितना संसाधन खर्च नहीं करता है, जिससे भारत को अपेक्षाकृत नुकसान है। लकी ने कहा कि फेसबुक अपने कंटेंट मॉडरेटर्स को स्वतंत्र रूप से काम करने दे या कंपनी की वास्तविक गाइडलाइंस के मुताबिक काम करने दे तो समाज में ज्यादा शांति और सद्भाव होगा।

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