Only Hindi News Today

गैरेज और डोरमेट्री में शुरू हुए एप्पल, अमेजॉन, फेसबुक और गूगल जैसी अमेरिकी कंपनियां आज विश्व की सबसे बड़ी कंपनियां बन चुकी है। बीते दशकों में इन्होंने जिस तेजी से सोशल मीडिया, इंटरनेट और ऑनलाइन रिटेल सेक्टर में एकाधिकार स्थापित किया। उसने अमेरिकी कांग्रेस को इनकी पड़ताल के लिए मजबूर कर दिया।

भारत में छोटे कारोबार और कारोबारियों पर असर

इसमें कंपनियों के वर्चस्ववादी व्यवहार का खुलासा हुआ। कंपनियों ने अपना कारोबार बढ़ाने के लिए छोटे कारोबार और कारोबारियों को नुकसान पहुंचाया। अपने पास इकट्ठा हुए आम नागरिकों के निजी डेटा का अनैतिक उपयोग कर प्रतिस्पर्धा को ही खत्म कर दिया। अब अमेरिकी संसद में इन पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। ऐसा हुआ तो भारत पर भी इसका असर होगा। क्योंकि यह कंपनियां हमारे यहां भी बड़े स्तर पर काम कर रही हैं।

सवाल उठ रहा है कि क्या भारत भी इन कंपनियों पर कोई कार्रवाई कर सकता है? क्या भारत में भी इन्हीं की तरह का अधिकार वादी एकाधिकार विवाद व्यवहार कर रही है अन्य कंपनियों को भी कार्रवाई की जद में लाया जाएगा?

इसी बीच फेसबुक और ट्विटर पर ताजा आरोप लगे हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिद्वंदी जो बिडेन के हक में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग होने दिया। इस पर ट्रंप ने इन कंपनियों के विभाजन की बात बुधवार को कही। अमेरिका की तरह ही भारत में भी इन टेक कंपनियों पर जनमत प्रभावित करने के आरोप लगे। पिछले महीने फेसबुक की एक पूर्व कर्मचारी बता चुकी हैं कि यह प्लेटफॉर्म भारत की राजनीतिक गतिविधियों पर हस्तक्षेप कर रहा है।

अमेरिकी कांग्रेस में एकाधिकार तोड़ने के लिए नए नियम

कारोबार से लेकर लोकतंत्र तक हमें इन कंपनियों को हस्तक्षेप करने की ताकत मिली, क्योंकि यह अपने अपने क्षेत्र में एकाधिकार बना चुकी हैं। अमेरिकी कांग्रेस में इसी एकाधिकार को तोड़ने के लिए स्पर्धारोधी नियम बने हैं। इन पर नए मानक लागू होने जा रहे हैं। भारत में भारतीय स्पर्धा आयोग इस पर निगरानी के लिए बनाया गया था। उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका की तरह यहां भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

अमेजन के उदाहरण से समझिए…

बिक्री केवल 5 फीसदी, कब्जा 40% बाजार पर

अमेरिकी कांग्रेस ने ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन पर अहम खुलासों में बताया कि अपने ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के इलेक्ट्रॉनिक और ब्यूटी सेक्टर में अमेजन खुद के बनाए केवल 5% उत्पाद बेचता है। फिर भी इस सेक्टर के 35 से 40% बाजार पर उसका कब्जा है। किचन फॉर होम अप्लायंस के मात्र 2 फीसदी उत्पाद उसके हैं। लेकिन करीब 30 फ़ीसदी बिक्री इन्हीं उत्पादों की होती है। इस एकाधिकार के लिए उसका अपना मॉडल है जिसमें ग्राहकों द्वारा पसंद किए जा रहे छोटे कारोबारियों के उत्पादों का अपने पास जमा डाटा का अमेजन अनैतिक उपयोग कर रहा है।

उपभोक्ताओं को क्या वाकई होता है फायदा 

भारी डिस्काउंट और बहुत कुछ फ्री मिल रहा है तो फिर आम नागरिकों को चिंता क्यों करनी चाहिए? 2016 में भारत में रिलायंस जियो ने 4G सेवा शुरू की जिसमें उपभोक्ताओं को करीब 1 वर्ष तक इंटरनेट और कॉलिंग की मुफ्त सेवाएं दी गई। परिणाम एक समय 15 से ज्यादा टेलीकॉम कंपनियां भारत में सेवाएं दे रही थी, आज महज 3 बची हैं। पिछले एक वर्ष में इन कंपनियों ने दरें बढ़ाने की कई बार घोषणा की।

महामारी से ठीक पहले इसी वर्ष भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की रिपोर्ट में फ्लिपकार्ट और अमेजन को विभिन्न स्मार्टफोन अपने ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के जरिए एकाधिकार से बेचने पर जांच करवाने की घोषणा की थी। महामारी में ई-कॉमर्स ने सिर्फ तेजी से बढ़ा, बल्कि इसमें विदेशी निवेश भी कई गुना हो गया। विशेषज्ञ इसे एकाधिकार के तौर पर देख रहे हैं।

Source link

Leave a Reply