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अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

Updated Mon, 19 Oct 2020 12:51 AM IST



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बारामूला। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के तंगमार्ग इलाके में रहने वाले एक सुरक्षा गार्ड के जुड़वां बेटों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) 2020 में सफलता हासिल कर कश्मीर के युवाओं के लिए नई मिसाल पेश की है। गौहर बशीर और शाकिर बशीर कुंजर के बाटपोरा गांव में रहते हैं, उन्होंने कुल 720 अंकों में से क्रमश: 651 और 657 अंक हासिल किए हैं। इस मौके पर उनके पिता बशीर अहमद ने कहा कि अंतत: अब मेरा सपना पूरा हो गया।

अमर उजाला के साथ बातचीत में गौहर ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है क्योंकि उन्होंने देश की प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की है। बताया कि वर्ष 2019 में दोनों भाइयों ने जेईई मेंस की परीक्षा में सफलता हासिल की थी और एनआईटी श्रीनगर में दाखिला लिया था। इस वर्ष नीट के लिए उनका यह दूसरा प्रयास था। हमने कोविड-19 के कारण मिले मौके को पढ़ाई के लिए समर्पित कर दिया, नतीजा सामने है।

इस मौके पर जुड़वां बेटों के पिता बशीर अहमद ने बताया कि वह उचित मूल्य की दुकान पर सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हैं। बच्चों को ज्यादा मदद करने में सक्षम नहीं था परंतु जितना संभव था पूरी कोशिश की। आज मुझे बच्चों की सफलता पर बेहद गर्व महसूस हो रहा है। लंबे समय से बहुप्रतीक्षित सपना सच हो गया। बेटों ने पूरी कश्मीर घाटी को गौरवान्वित किया है।

बारामूला। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के तंगमार्ग इलाके में रहने वाले एक सुरक्षा गार्ड के जुड़वां बेटों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) 2020 में सफलता हासिल कर कश्मीर के युवाओं के लिए नई मिसाल पेश की है। गौहर बशीर और शाकिर बशीर कुंजर के बाटपोरा गांव में रहते हैं, उन्होंने कुल 720 अंकों में से क्रमश: 651 और 657 अंक हासिल किए हैं। इस मौके पर उनके पिता बशीर अहमद ने कहा कि अंतत: अब मेरा सपना पूरा हो गया।

अमर उजाला के साथ बातचीत में गौहर ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है क्योंकि उन्होंने देश की प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की है। बताया कि वर्ष 2019 में दोनों भाइयों ने जेईई मेंस की परीक्षा में सफलता हासिल की थी और एनआईटी श्रीनगर में दाखिला लिया था। इस वर्ष नीट के लिए उनका यह दूसरा प्रयास था। हमने कोविड-19 के कारण मिले मौके को पढ़ाई के लिए समर्पित कर दिया, नतीजा सामने है।

इस मौके पर जुड़वां बेटों के पिता बशीर अहमद ने बताया कि वह उचित मूल्य की दुकान पर सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हैं। बच्चों को ज्यादा मदद करने में सक्षम नहीं था परंतु जितना संभव था पूरी कोशिश की। आज मुझे बच्चों की सफलता पर बेहद गर्व महसूस हो रहा है। लंबे समय से बहुप्रतीक्षित सपना सच हो गया। बेटों ने पूरी कश्मीर घाटी को गौरवान्वित किया है।

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