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फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) रविवार को अपना 30वां जन्मदिन मना रहे हैं। कार्तिक आर्यन ग्वालियर, मध्य प्रदेश में जन्मे थे, लेकिन अपने बचपन का सपना पूरा करने के लिए वह मुंबई पहुंचे। बर्थडे के मौके पर सोशल मीडिया पर फैन्स उन्हें बधाई दे रहे हैं। 

करोड़ों लोगों के दिल की शान कार्तिक आर्यन के लिए फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाना काफी मुश्किलों भरा सफर रहा। एक समय ऐसा भी आया था, जब उन्हें स्टूडियो के बाहर से ही रिजेक्ट कर दिया जाता था। यहां तक कि मुंबई में गुजारा करने के लिए वह 12 रूममेट्स के साथ तक रहे। बाद में कड़ी मेहनत कर उन्होंने लोगों के बीच पहचान बनाई। एक के बाद एक हिट फिल्म देकर कार्तिक ने इंडस्ट्री में सिक्का जमाया। 

स्कूल की पढ़ाई ग्वालियर से पूरी करने के बाद कार्तिक कॉलेज की पढ़ाई के लिए मुंबई पहुंचे। ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे संग बातचीत में कार्तिक आर्यन ने बताया था, “9वीं क्लास में मैंने फिल्म ‘बाजीगर’ देखी थी। तभी मैंने यह तय कर लिया था कि मुझे स्क्रीन के उस तरफ रहना है। स्कूल की पढ़ाई ग्वालियर में ही रहकर पूरी की। इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई के साथ बचपन का सपना पूरा करने का मौका मिला। मुंबई पहुंचा। कॉलेज के हॉस्टल में रहता था। एक्टिंग करने का कोई एक्सपीरियंस नहीं था और न ही मेरे इस लाइन से जुड़े कोई कॉन्टैक्ट्स थे। रोज फेसबुक और गूगल पर ‘एक्टर नीडेड’ कीवर्ड डालता था और देखता था कि कहां किस चीज के लिए ऑडिशन्स चल रहे हैं।”

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कार्तिक आगे कहते हैं कि मैं हफ्ते में 6-7 घंटे का सफर तय कर ऑडिशन्स देने लोकल ट्रेन से जाता था। उस समय तो मैं कई बार स्टूडियो के बाहर से ही रिजेक्ट हो जाता था, क्योंकि मैं उस तरह के किरदार की तरह नहीं दिखता था। पर मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। जल्दी ही मैं टीवी ऐड्स करने लगा। पैसों की तंगी के कारण उस समय मैं 12 रूममेट्स के साथ रहता था। एक बार मेरे किसी दोस्त ने मुझे फोटोशूट कराने के लिए बोला। कहा कि पोर्टफोलियो तैयार करो और हर जगह अपनी वह फोटोज भेजो। मैंने जैसे-तैसे पैसे इकट्ठा कर यह भी किया। कई बार मैंने इन ऑडिशन्स के लिए अपना कॉलेज भी बंक किया और मेरे माता-पिता को इस बारे में कुछ नहीं पता था। 

कार्तिक कहते हैं कि करीब ढाई साल के संघर्ष के बाद मुझे फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ मिली। मैंने इस फिल्म के लिए एक बार नहीं कई बार ऑडिशन दिया था। जब मुझे रोल मिला तो मैंने अपनी मां के पास कॉल किया। उन्हें इन सब पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ। मेरी मम्मी अड़ी थीं कि मैं अपनी डिग्री पूरी कर लूं। मैंने एग्जाम दिए और फिल्म की शूटिंग शुरू की। एक बार जब मैं कॉलेज के हॉल में बैठा तो लोग मेरी फोटो खींच रहे थे। मेरे लिए वह अहसास बहुत शानदार था। ‘प्यार का पंचनामा’ के बाद भी मेरा करियर आगे नहीं बढ़ रहा था। फिर जाकर फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने सबकुछ बदल दिया। आज जो मेरे पास है, वह कभी नहीं होता अगर मैंने खुदपर विश्वास न किया होता। मुझे गर्व है कि मैं इस समय कहां हूं।



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