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डिजिटल लेनदेन के दौर में चेक से भुगतान 3 प्रतिशत रह गया : आरबीआई

भारत में डिजिटल लेनदेन पिछले पांच साल में बेहद तेजी से बढ़ा

मुंबई:

डिजिटल लेनदेन (Digital Payment) के दौर में भुगतान के लिए चेक (Cheque) का इस्तेमाल बेहद कम हो गया है. आरबीआई के ताजा आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन लेनदेन में चेक से भुगतान की हिस्सेदारी महज 3 फीसदी रह गई है, जो पांच साल पहले 15 फीसदी से ज्यादा थी. डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन की वजह से बीते वित्त वर्ष 2019-20 में चेक के जरिये खुदरा भुगतान का आंकड़ा काफी नीचे आ गया है.बीते वित्त वर्ष में कुल खुद भुगतान में चेक क्लियरिंग का हिस्सा घटकर मात्र 2.96 प्रतिशत रह गया. हालांकि मूल्य के हिसाब से यह 20.08 प्रतिशत रहा.

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पांच वर्षों में डिजिटल लेनदेन कई गुना बढ़ा

वित्त वर्ष 2015-16 में नोटबंदी के बाद केंद्रीय बैंक ने डिजिटल भुगतान को काफी तेजी से आगे बढ़ाना शुरू किया था. उस समय खुदरा भुगतान में मात्रा के हिसाब से चेक का हिस्सा 15.81 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 46.08 प्रतिशत था. 2015-16 में चेक के जरिये भुगतान मात्रा के हिसाब से 15.81 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 46.08 प्रतिशत हिस्सा था. वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा घटकर क्रमश: 11.18 प्रतिशत और 36.79 प्रतिशत पर आ गया. 2017-18 में यह मूल्य के हिसाब से 7.49 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 28.78 प्रतिशत पर आ गया. वहीं 2018-19 में यह और घटकर क्रमश 4.60 प्रतिशत और 22.65 प्रतिशत पर आ गया.

55 फीसदी की दर से बढ़ रहा डिजिटल भुगतान

रिजर्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 से 2019-20 के दौरान मात्रा के हिसाब से डिजिटल भुगतान सालाना आधार पर 55.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 593.61 करोड़ से 3,434.56 करोड़ पर पहुंच गया. मूल्य के हिसाब से यह 920.38 लाख करोड़ रुपये से 1,623.05 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसमें सालाना आधार पर 15.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई.

वित्त वर्ष 2016-17 में डिजिटल भुगतान 593.61 करोड़ से 969.12 करोड़ पर पहुंच गया. मूल्य के हिसाब से यह इस दौरान 1,120.99 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

कोरोना काल में और बढ़ेगा डिजिटल लेनदेन

2017-18 में यह मात्रा के हिसाब से 1,459.01 करोड़ पर और मूल्य हिसाब से 1,369.86 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बाद में इसमें और तेज वृद्धि हुई और 2018-19 में यह मात्रा के हिसाब से 2,343.40 करोड़ और मात्रा के हिसाब से 1,638.52 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.कोविड-19 महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते मात्रा के हिसाब से आगे डिजिटल भुगतान का आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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