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आतंकियो को पनाह देने वाला पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स की काली सूची में आने से बचने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। चीन के अलावा उसने उन देशों को साधने की कवायद शुरू की है जो एफएटीएफ में इसके कारनामो पर पर्दा डाल सकें। हालांकि भारत भी पाकिस्तान को लगभग हर मंच पर बेनकाब कर रहा है। पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए और उसकी दिखावटी कार्रवाई से भारत ने अमेरिका सहित अन्य प्रभावी देशों को आगाह किया है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एफएटीएफ की क्षेत्रीय इकाई एशिया पैसिफिक ग्रुप की बैठक के बाद तुर्की, मलेशिया और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है। माना जा रहा है कि ये बातचीत एफएटीएफ को लेकर हुई है। जहाँ उसको आतंक पर कार्रवाई को लेकर सवालो का जवाब देना है।

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21 से 23 अक्तूबर के बीच होगी बैठक
21 अक्तूबर से 23 अक्तूबर के बीच पेरिस में एफएटीएफ की वर्चुअल रिव्यू मीटिंग होनी है। इस दौरान पाकिस्तान को लेकर भी चर्चा होगी। माना जा रहा है कि सदस्य देशों में अगर सहमति बन जाती है तो पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है। हालांकि, चीन, तुर्की और मलेशिया पहले भी पाकिस्तान को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे हैं।

एपीजी बैठक में घिरा था पाकिस्तान
कुछ दिन पहले हुई एशिया पैसिफिक ग्रुप की बैठक में कहा गया था कि पाकिस्तान ने एफएटीएफ की ओर से की गई 40 सिफारिशों में से केवल दो पर प्रगति की है। करीब 12 पन्ने की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के सिफारिशों के पूरा करने में एक साल में कोई बदलाव नहीं आया है। एपीजी ने घोषणा की है कि पाकिस्तान विस्तारित फॉलोअप लिस्ट में बना रहेगा। पाकिस्ता को 40 सुझावों को लागू करने की दिशा में किए गए प्रयासों की रिपोर्ट देनी होगी।

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हजारों आतंकियो के नाम हटाए
पाकिस्तान ने पिछले 18 महीने में निगरानी सूची से बड़ी संख्या में आतंकवादियों के नाम को हटा दिया था। सूत्रों के मुताबिक इस लिस्ट में वर्ष 2018 में कुल 7600 नाम थे लेकिन पिछले 18 महीने में इसकी संख्यास को घटाकर अब 3800 कर दिया गया है। यही नहीं इस साल मार्च महीने की शुरुआत से लेकर अब तक 1800 नामों को लिस्ट से हटाया गया है।

ब्लैकलिस्ट होने का खतरा बरकरार
एफएटीएफ द्वारा ब्लैकलिस्ट में शामिल किए जाने पर पाकिस्तान को उसी श्रेणी में रखा जाएगा, जिसमें ईरान और उत्तर कोरिया को रखा गया है और इसका मतलब यह होगा कि वह अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे आईएमएफ और विश्व बैंक से कोई ऋण प्राप्त नहीं कर सकेगा। इससे अन्य देशों के साथ वित्तीय डील करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

2018 से लटकी है तलवार
पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में डाला था। अक्टूबर 2018 और फरवरी 2019 में हुई समीक्षा में भी पाक को राहत नहीं मिली थी। पाक एफएटीएफ की सिफारिशों पर काम करने में विफल रहा है। उसपर लगातार ब्लैक लिस्ट में शामिल होने का खतरा बना हुआ है।

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