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स्मार्टफोन की लत महिलाओं की गर्दन पर कहर बरपा रही है। आलम यह है कि हर दस में से तीन महिला यूजर ‘टेक्स्ट नेक’ से निजात पाने की कोशिशों में जुटी है। ब्रिटेन की शीर्ष कॉस्मेटिक निर्माता कंपनी ‘प्रे ब्यूटी’ का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक दो-तिहाई महिला यूजर गर्दन और कंधे में असहनीय दर्द का सामना कर रही हैं तो एक-चौथाई गले पर झुर्रियों के निशान उभरने से परेशान हैं। हालांकि, 33 फीसदी महिलाओं को दर्द के मुकाबले झुर्रियों से बुढ़ापा झलकने की चिंता ज्यादा सता रही है।
अध्ययन में शामिल 42 फीसदी महिलाओं ने कोरोनाकाल में स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ने की बात स्वीकारी। उन्होंने एक घंटे में औसतन 13 बार स्मार्टफोन खंगालने का खुलासा किया। दो-तिहाई ने कहा कि अगर वे इस बात से वाकिफ होतीं कि ‘टेक्स्ट नेक’ में गर्दन में दर्द के साथ झुर्रियों की भी समस्या पनपने लगती है तो वे स्मार्टफोन से दूरी बनाने के उपाय पहले ही शुरू कर देतीं। 25 फीसदी महिलाएं झुर्रियों से निजात पाने के लिए महंगी एंटी-एजिंग क्रीम का इस्तेमाल करने लगी हैं।

एक नजर ‘टेक्स्ट नेक’ पर
-यूजर जब सीधी मुद्रा में खड़ा या बैठा होता है तो उसके सिर का वजन 4.5 से 5.5 किलोग्राम के बीच होता है। लेकिन जब वह स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप पर काम करने या मैसेज पढ़ने के लिए सिर झुकाता है तो यह दोगुना या तीगुना तक हो जाता है। 

गर्दन-कंधे में दर्द-झनझनाहट
-न्यूयॉर्क के एक स्पाइन इंजरी सेंटर ने 2015 में पाया था कि 15 डिग्री के कोण पर झुकाने पर सिर का वजन 12.3 किलोग्राम, जबकि 45 डिग्री तक नीचे करने पर 22.3 किलोग्राम हो जाता है। इससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यूजर को न सिर्फ असहनीय दर्द झेलना पड़ता है, बल्कि गर्दन और कंधे के आसपास के हिस्से में कुछ रेंगने जैसी अनुभूति भी हो सकती है।

सिर ज्यादा देर झुकाए न रखें
-मुख्य शोधकर्ता एनी टोकर ने सिर झुकाकर मैसेज पढ़ने या टाइपिंग करने के बजाय फोन और टैबलेट की स्क्रीन को आंखों की सीध में लाकर उस पर काम करने की सलाह दी। लंबे समय तक फोन के इस्तेमाल के बाद गर्दन को दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे घुमाने वाली एक्सरसाइज करना भी फायदेमंद है।

ये पांच साइडइफेक्ट भी सामने आ रहे
1.स्मार्टफोन पिंकी
-चैटिंग के दौरान जब अंगूठे कीबोर्ड पर मैसेज टाइप करने में व्यस्त होते हैं तो स्मार्टफोन और टैबलेट का सारा भार लिटिल फिंगर (कनिष्ठा) पर आ जाता है। इससे यह उंगली धीरे-धीरे हथेली की ओर मुड़ती चली जाती है। विशेषज्ञ इस अवस्था को ‘स्मार्टफोन पिंकी’ कहते हैं। 
उंगलियों का बिगड़ता है आकार 
-स्मार्टफोन पर लंबे समय तक चैटिंग करने पर अंगूठे और उंगलियों के आसपास के जोड़े जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं
-उनमें मौजूद कार्टिलेज में या तो क्षरण की शिकायत होने लगती है या फिर आसपास बेतरतीब हड्डियां विकसित होने लगती हैं
-दोनों ही सूरतों में उंगलियों का आकार बिगड़ जाता है, भार सहने और छोटे-बड़े काम निपटाने की क्षमता में भी गिरावट आती है

2.कीबोर्ड क्लॉ
-चैटिंग की लत से उंगिलयों, कलाइयों और हथेलियों के सुन्न पड़ने तथा नस चढ़ने की शिकायत सता सकती है। चिकित्सकीय भाषा में यह अवस्था ‘कीबोर्ड क्लॉ’ कहलाती है। इसलिए फोन या टैबलेट को हमेशा एक हाथ में थामकर दूसरे हाथ की उंगलियों से ही टाइपिंग करें।
एक एक्सरसाइज से मिलेगी राहत
-लंबी चैटिंग के बाद दोनों हाथों को ऊपर की ओर फैलाएं, ध्यान रखें कि आपकी हथेलियां कमरे की छत की ओर होनी चाहिए
-अब उंगलियों के ऊपरी हिस्से को लगातार 20 सेकेंड तक नीचे की तरफ झुकाने की कोशिश करें, पांच से दस बार दोहराएं यह प्रक्रिया

3.सेलफोन एल्बो
-स्मार्टफोन को कान पर लगाते समय उंगलियों और कलाई के रास्ते कोहनी को जाने वाली एक नस पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक हाथ इसी मुद्रा में मोड़े रखने पर खून का प्रवाह भी बाधित हो सकता है। इससे यूजर को असहनीय दर्द और उंगलियों में गुदगुदी जैसे एहसास की शिकायत होती है।
ईयरफोन के इस्तेमाल में भलाई
-फोन और टैबलेट पर लंबी बात करने के लिए ईयरफोन या फिर ब्लूटुथ हेडसेट का इस्तेमाल करें।

4.‘फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम’
-इस बीमारी में यूजर को फोन वाइब्रेट होने या उसकी घंटी बजने का भ्रम होता है। एक अनुमान के मुताबिक हर दस में सात स्मार्टफोन यूजर ‘फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम’ के शिकार हैं। 87 फीसदी पीड़ितों को यह भ्रम हफ्ते में एक बार, जबकि 13 फीसदी को रोजाना परेशान करता है। 
सोते समय फोन से दूरी बनाएं
-फोन दूर होने पर इस कदर बेचैनी होती है कि लोग न तो कोई काम ढंग से निपटा पाते हैं और न ही आराम कर पाते हैं
-जरूरी काम करते समय या फिर रात को सोते वक्त फोन आसपास न रखें, मुमकिन हो तो उसे स्विच ऑफ कर दें

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5.ड्राई आई सिंड्रोम
-स्क्रीन पर टकटकी लगाए रखने से पलकें झपकाने की दर 33 फीसदी तक कम हो जाती है। इससे आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू का उत्पादन नहीं हो पाता। धूल-मिट्टी और प्रदूषकों से आंखों की कोशिकाओं व रेटिना की रक्षा करने के लिए आंसू काफी अहम माने जाते हैं। 
दूर की नजर के लिए घातक
-बच्चों और युवाओं में दूर की नजर कमजोर पड़ने के बढ़ते मामलों के लिए ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है

ऐप छुड़ाएंगे लत
Offtime, Moment, BreakFree, AppDetox, Flipd Focus & Study Timer, StayOnTask जैसे ऐप गैजेट की लत छुड़ाने में खासे मददगार हो सकते हैं। ये यूजर को बताते हैं कि वह कितनी देर से स्क्रीन के सामने डटा हुआ है। साथ ही तय अंतराल पर अलार्म बजाकर ब्रेक लेने का संदेश देते हैं। कुछ ऐप तो फोन खुद बखुद ऑफ भी कर देते हैं।

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