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हाइलाइट्स:

  • पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो और ममता बनर्जी के खास कैबिनेट मंत्री शुभेंदु अधिकारी बगावत की राह पर
  • नंदीग्राम में एक अलग रैली कर बगावत का बिगुल फूंकने वाले शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को ममता की कैबिनेट बैठक में नदारद
  • बीजेपी शुभेंदु को पार्टी जॉइन करने का पहले ही खुला ऑफर दे चुकी है, इससे अब ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गईं

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव से पहले ममता सरकार को बड़ा झटका लग सकता है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो और ममता बनर्जी के खास कैबिनेट मंत्री शुभेंदु अधिकारी बगावत की राह पर हैं। नंदीग्राम में एक अलग रैली कर बगावत का बिगुल फूंकने वाले शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को ममता की कैबिनेट बैठक में नहीं पहुंचे।

इसके साथ ही तीन और मंत्री राजीव बंद्योपाध्याय, गौतम देव और रवींद्रनाथ घोष भी बैठक में नहीं पहुंचे। यह भी खबर है कि शुभेंदु अधिकारी के तीनों करीबी नेताओं की सुरक्षा भी हटा दी गई है। उधर बीजेपी शुभेंदु को पार्टी जॉइन करने का पहले ही खुला ऑफर दे चुकी है। इससे अब ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं।

पढ़ें: कौन हैं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को आंख दिखाने वाले शुभेंदु अधिकारी, जानिए सब कुछ

अमित शाह के दौरे के बाद हलचल तेज
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को बंगाल में दो दिवसीय दौरे पर गए थे और वहां उन्होंने बीजेपी की तैयारी के साथ ममता सरकार पर जबर्दस्त निशाना साधा था। शाह के लौटने के बाद बंगाल की राजनीति में अचानक गर्माहट बढ़ गई। ममता के लिए संभावित झटके को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

नंदीग्राम में टीएमसी से अलग रैली की थी
शुभेंदु की तरफ से बगावत का पहला कदम पिछले नंदीग्राम में देखने को मिला, जब उन्होंने टीएमसी से अलग रैली कर ममता को खुली चुनौती दी। इस बैठक में न तो ममता का कोई पोस्टर था, वहीं रैली के आखिर में वह भारत माता की जय के नारे लगाते भी नजर आए। इससे संकेत मिलने लगे कि वह ममता से अलग होने के मूड में हैं।

बताया जा रहा है कि शुभेंदु काफी वक्त से पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। लेकिन पहली बार उन्होंने अपनी नाराजगी का सार्वजनिक तौर पर इजहार किया। पिछले एक महीने से शुभेंदु की हर रैली में जो पोस्टर लगाए जा रहे हैं उनमें ममता बनर्जी और टीएमसी दोनों का ही नामोनिशान नजर नहीं आ रहा।

कौन हैं शुभेंदु अधिकारी?
शुभेंदु अधिकारी टीएमसी में ममता के बाद सबसे लोकप्रिय और कद्दावर नेता हैं। वह सीएम ममता बनर्जी के दाहिने हाथ माने जाते हैं। जिस नंदीग्राम आंदोलन से ममता बनर्जी को बंगाल की सत्ता मिली थी, उस आंदोलन का आर्किटेक्ट शुभेंदु को माना जाता है। ममता बनर्जी के साथ शुरुआती दौर से ही जुड़े हैं। वह कैबिनेट मंत्री है। परिवहन, जल और सिंचाई मंत्रालय उनके पास हैं। दक्षिण बंगाल के इलाकों में इनका काफी प्रभाव माना जाता है।

शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में तृणमूल के लोकप्रिय चेहरे रहे हैं। उनका परिवार भी बंगाल की राजनीति में अच्छा खासा दखल रखता है। उनके भाई और पिता राजनीति में हैं और सांसद हैं।

ममता से क्यों नाराज हैं शुभेंदु?
शुभेंदु अधिकारी ममता कैबिनेट में नंबर दो के मंत्री कहे जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से जैसे-जैसे ममता के भतीजे अभिषेक का राजनीति में उदय होने लगा, शुभेंदु का कद घटने लगा। शुभेंदु इसी बात से नाराज थे। शुभेंदु के बीजेपी से भी करीब होने के कयास है।

शुभेंदु की एंट्री पर बीजेपी की चुप्पी
उधर बीजेपी भी शुभेंदु की पार्टी में एंट्री पर चुप्पी साधे हुए है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव व बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के जब शुभेंदु के बीजेपी में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसकी पुष्टि नहीं की, तो इसका खंडन भी नहीं किया।

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