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सर्राफा बाजार में सोने का हाजिर भाव 51000 के पार चला गया है। आने वाले दिनों में इसकी कीमत और भी चढ़ सकती है। अगर रिटर्न की बात करें तो सोना सभी एसेट्स पर भारी पड़ रहा है। सोने के बेहतरीन प्रदर्शन को देख खुदरा निवेशक भी इसकी ओर आकर्षित होने लगे हैं, जिन्हें शेयर बाजारों से अप्रत्याशित रूप से कम रिटर्न ने हिला दिया है। इस सबके बीच सोने की रफ्तार का फायदा अगर आप उठाना चाहते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसे कहां और किस रूप में खरीद रहे हैं? 

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सोने के आभूषण खरीदना और इसमें निवेश करना, दोनों अलग चीजे हैं। सोने के जेवरों के प्रति भारतीयों का प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में निवेश के लिए सोने के जेवर खरीदना समझदारी नहीं है। क्योंकि जेवर का मेकिंग चार्ज और जीएसटी मिलकर इसकी कीमत कम से कम 25 फीसदी तक बढ़ा देते हैं। 

सोना खरीदने का स्मार्ट तरीका

भारत सरकार द्वारा जारी गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB), सोने में निवेश करने के स्मार्ट तरीके हैं। गोल्ड ईटीएफ एक्सचेंजों में सूचीबद्ध हैं और भौतिक सोने में निवेश करते हैं। गोल्ड ईटीएफ की प्रत्येक इकाई 24 कैरेट सोने के 1/2 ग्राम की होती है। गोल्ड ईटीएफ को एक्सचेंजों पर कभी भी बेचा जा सकता है। गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बांड से अधिक सुविधाजनक फिजिकल गोल्ड होता है। यानी ज्वैलर्स से खरीदने से लेकर सोने को रखने व बेचने में आसानी होती है। जबकि गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बांड में फिजिकल गोल्ड की तरह शुद्धता चेक करने की भी जरूरत नहीं होती है।

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क्वांटम एसेट मैनेजमेंट के सीनियर फंड मैनेजर, चिराग मेहता कहते हैं, “गोल्ड ईटीएफ में निवेशक कोई भी शुल्क या प्रीमियम नहीं लेते हैं। इसके अलावा, उन्हें सोने की शुद्धता, भंडारण और बीमा के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, गोल्ड ईटीएफ का भौतिक सोने के मौजूदा बाजार मूल्य पर एक्सचेंज पर कारोबार किया जाता है। इस तरह निवेशक खरीदारी पर या खरीद पर छूट के बिना, बाजार मूल्य के करीब होल्डिंग खरीद या बेच सकते हैं। ”

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दूसरा तरीका है SGB के जरिए निवेश। एसजीबी सरकारी प्रतिभूतियां हैं जो सोने के ग्राम में दी गई हैं। यह बांड भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी किया जाता है। स्वर्ण बांड एक ग्राम गोल्ड के मूल्यवर्ग में जारी किए जाते हैं। एक व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में SGBs के माध्यम से अधिकतम 4 किलोग्राम सोने के लिए निवेश कर सकता है। जब आप इसे बेचेंगे, यह बाजार मूल्य पर बिकेगा। हालांकि यह 8 वर्ष के लिए फिक्स होता है। बांड जारी करने की तारीख से पांचवें वर्ष के बाद यह एक्सचेंज डिमैट रूप में ट्रेडेबल होता है।

 



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