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टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 25 Jul 2020 11:01 AM IST

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इंटरनेट है तो हैकिंग होगी? अब इस धारणा को बदलने की जरूरत है, क्योंकि अमेरिका ने एक ऐसे इंटरनेट का ब्लूप्रिंट तैयार किया है जो कि हैकप्रूफ है। अमेरिका अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने क्वांटम कंप्यूटर आधारित वर्चुअल अनहैकेबल “virtually unhackable”इंटरनेट का खांका तैयार किया है।

अमेरिका डिपार्टमेंट ऑफ इनर्जी ने (DOE) गुरुवार को एक इस इंटरनेट का ब्लूप्रिंट जारी किया है। इस इंटरनेट को लॉ ऑफ क्वांटम मैकेनिक्स के जरिए तैयार किया गया है। विभाग यूनिवर्सिटीज और शोधकर्ताओं के साथ इस प्रोटोटाइप पर काम कर रहा है।

इसी साल फरवरी में DOE के एरोगॉन नेशनल लेब्रोरेट्री और शिकागो यूनिवर्सिटी ने 83 किलोमीटर का क्वांटम लूप तैयार किया था जो कि अब तक का सबसे लंबा क्वांटम नेटवर्क था। इस प्रोजेक्ट का मकसद एक सिक्योर नेटवर्क तैयार करना है। इस प्रोजेक्ट की मदद से वैज्ञानिक वर्चुअल अनहैकेबल नेटवर्क तैयार करने की कोशिश करेंगे। विभाग का कहना है कि इस नेटवर्क का सबसे पहले इस्तेमाल बैंकिंग, स्वास्थ्य और सिक्योरिटी एयरक्राफ्ट में होगा।

बता दें कि क्वांटम नेटवर्क क्वांटम कंप्यूटर पर आधारित है। ये कंप्यूटर क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। साधारण कंप्यूटर में जहां गणना के लिए चिपों का इस्तेमाल होता है, वहीं क्वांटम कंप्यूटर में गणना के लिए चिपों के स्थान पर परमाणुओं का प्रयोग किया जाता है। क्वांटम कंप्यूटर में प्रोसेसिंस के लिए बाइनरी अंकों की जगह क्यूबिट्स (आंशिक 0 और आंशिक 1) का इस्तेमाल होता है।

इंटरनेट है तो हैकिंग होगी? अब इस धारणा को बदलने की जरूरत है, क्योंकि अमेरिका ने एक ऐसे इंटरनेट का ब्लूप्रिंट तैयार किया है जो कि हैकप्रूफ है। अमेरिका अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने क्वांटम कंप्यूटर आधारित वर्चुअल अनहैकेबल “virtually unhackable”इंटरनेट का खांका तैयार किया है।

अमेरिका डिपार्टमेंट ऑफ इनर्जी ने (DOE) गुरुवार को एक इस इंटरनेट का ब्लूप्रिंट जारी किया है। इस इंटरनेट को लॉ ऑफ क्वांटम मैकेनिक्स के जरिए तैयार किया गया है। विभाग यूनिवर्सिटीज और शोधकर्ताओं के साथ इस प्रोटोटाइप पर काम कर रहा है।

इसी साल फरवरी में DOE के एरोगॉन नेशनल लेब्रोरेट्री और शिकागो यूनिवर्सिटी ने 83 किलोमीटर का क्वांटम लूप तैयार किया था जो कि अब तक का सबसे लंबा क्वांटम नेटवर्क था। इस प्रोजेक्ट का मकसद एक सिक्योर नेटवर्क तैयार करना है। इस प्रोजेक्ट की मदद से वैज्ञानिक वर्चुअल अनहैकेबल नेटवर्क तैयार करने की कोशिश करेंगे। विभाग का कहना है कि इस नेटवर्क का सबसे पहले इस्तेमाल बैंकिंग, स्वास्थ्य और सिक्योरिटी एयरक्राफ्ट में होगा।

बता दें कि क्वांटम नेटवर्क क्वांटम कंप्यूटर पर आधारित है। ये कंप्यूटर क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। साधारण कंप्यूटर में जहां गणना के लिए चिपों का इस्तेमाल होता है, वहीं क्वांटम कंप्यूटर में गणना के लिए चिपों के स्थान पर परमाणुओं का प्रयोग किया जाता है। क्वांटम कंप्यूटर में प्रोसेसिंस के लिए बाइनरी अंकों की जगह क्यूबिट्स (आंशिक 0 और आंशिक 1) का इस्तेमाल होता है।

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